अकरुणत्वमकारणविग्रहः परधने परयोषिति च स्पृहा ॥
सुजनबन्धुजनेश्वसहिष्णुता प्रकृतिसिद्धमिदं हि दुरात्मनाम् ॥

फुका कोरडें वैर कीं निर्दयित्व परस्त्री परद्रव्य हें मुख्य तत्व ॥
अनिष्टत्व चिंती सुहृद्बांधवांचे स्वतःसिद्ध हें रूप पै दुर्जनांचे ॥

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